Yogasan: Sampoorna Swasthya ki Chabi

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ISBN: M002
AUTHOR NAME: Manoj Arya
EDITION: 2nd
BOOK CODE: M-002
MEDIUM: Hindi
FORMAT: Paper Back
PRICE: 60

Rs. 60

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इस अनुपम पुस्तक ‘योगासनµसंपूर्ण स्वास्थ्य की चाबी’ की रचना उन सभी पाठकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई है जो योगासन द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ बनाना चाहते हैं। आधुनिक युग के तनाव एवं भागदौड़ से भरे जीवन में लोग अपने स्वास्थ्य का उचित रूप से ध्यान नहीं रख पाते हैं और उसकी उपेक्षा करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे छोटी-बड़ी कई बीमारियों के शिकार बन जाते हैं और समय अथवा धन के अभाव के कारण उनका सही निदान नहीं करवा पाते। इस पुस्तक की मदद से पाठक अपने घर में ही युगों-युगों से आजमाई गई योगासन की क्रियाएँ सीख सकते हैं और उनके नियमित प्रयोग द्वारा बिना किसी खर्च के अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं। पुस्तक में अष्टांग योग का संक्षिप्त परिचय योगासन एवं बीमारी,, विद्यार्थी और योगासन व्यक्तित्व विकास और योगासन, योगासन एवं रोग उपचार, स्त्रियाँ एवं योगासन, मानव शरीर की पोषण क्रिया, श्वसन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, प्राणायाम और योगासन, बंधज्ञान, आदि अध्याय एवं अनेक लाभकारी योगासन प्रमुख रूप से सम्मिलित किये गए हैं। आशा है, पुस्तक के समुचित अध्ययन एवं योगासनों के अभ्यास द्वारा आप अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाकर अपने स्वस्थ जीवन का संपूर्ण आनंद ले सकेंगे। स्मरण रखेंµस्वास्थ्य जीवन की सबसे अनमोल निधि है।

Bhoomika; Is Pustak ko likhne ka vichaar; Ashtaang Yog ka Sankshipt Parichay; Sthaan; Samay; Taiyaari; Yogasan aur Beemari; Vidhyarthi aur Beemari; Vidhyaarthi aur Yogasan; Vyaktitva Vikaas aur Yogasan; Yogasan evam Rog Upchaar; Yogasan aur Bhookh; Bhramcharya aur Yogasan; Kis avastha mein Yogasan nahi karne chahiye; Striyaan evam Yogasan; Maanav Shareer ki Poshankriya; Maanav mein Shavasan Tantra; Parisancharan Tantra; Pranayam aur Yogasan; Bandh Gyan; Sheershasan; Tadasan; Gardan ka Vyayaam; Trikonasan; Vrakchasan; Mayurchaal; Sarwaang Aasan; Garudasan; Vimanaasan; Hastpaadagushtaasan; Utaan Padasan; Halasan; Karn Peedasan; Pawanmuktasan (1); Pawanmuktasan (2); Padangushtanasa Sparshaasan; Paschimotaanasan; Aakarn Dhanushtkarasan; Jaanushirasan; Tolangulasan; Bhoonamanasan (1); Bhoonamanasan (2); Samprasaran Bhoonamanasan; Padagushthasan; Paadhastasan; Chakrasan; Vraschikasan; Prashthtanasan; Naukasan; Dhanurasan; Vajraasan; Saptvajrasan; Shashkasan; Ardhmatyendrasan; Ushtrasan (1); Ushtrasan (2); Siddhasan; Bakasan; Padmasan; Usthit Padmasan; Mayurasan; Abhyaas ke baad kya karein

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