Devarishi Narad

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ISBN: 978-93-87918-73-3
AUTHOR NAME: Ramnath Gupta
EDITION: 2020
BOOK CODE: M-009
MEDIUM: Hindi
FORMAT: Paper Back
PRICE: 45

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देवर्षि नारद का चरित्र अति पावन एवं ज्ञानियों का प्रेरणा ड्डोत है। लगभग सभी पुराणों और ग्रंथों में उनका और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों का वर्णन है। उनके उपदेश बहुत ही सारगर्भित और शिक्षाप्रद हैं एवं आज भी सब के लिए प्रासंगिक हैं।
देवर्षि सभी देवताओं, मनुष्यों, राक्षसों आदि के पूजनीय रहे हैं और सबने उन्हें सम्मान दिया है। वे विष्णु के परमभक्त हैं और सारे संसार में उनका गुणगान करते हुए विचरण करते हैं।
नारदजी का प्रत्येक उपदेश भगवान की स्तुति से ओत-प्रोत है और श्रोता को भगवान की भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
नारदजी को अपने चरित्र का कभी अभिमान नहीं हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने भी उनकी प्रशंसा की है जिसे इस पुस्तक में दिया गया है। नारदपुराण से उनकी ज्योतिष और गणितीय क्षमता के दर्शन होते हैं।

देवर्षि नारद: एक परिचय; नारदजी का प्रादुर्भाव; नारदजी का वानर-रूप होना; दक्ष प्रजापति का नारद मुनि को शाप; नारदजी का कुबेर-पुत्रों को शाप; वसुदेवजी को भागवतधर्म की शिक्षा (नौ योगेन्द्रों से महाराज निमि की भेंट); नारदजी का राजा बर्हिषत को उपदेश (वर्तमान जीवन, मृत्यु के पश्चात् जीवन और इनके निर्माण में मानसिक विचारों के महत्त्व का प्रतिपादन); नारदजी का शुकदेवजी को उपदेश; नारदजी का राजा युधिष्ठिर को उपदेश; नारदजी द्वारा भगवान कृष्ण की गृहचर्या देखना; नारदजी को विष्णु-माया का दर्शन; श्रीकृष्ण द्वारा नारदजी के गुणों का वर्णन; नारदजी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को पूज्य-पुरुष के लक्षण बताना; भागवतपुराण लिखने हेतु व्यासजी को प्रेरित करना; विविध-प्रसंग : ‘नारद पंचरात्रा’ ग्रंथ; सनत्कुमार का नारदजी को उपदेश; ‘रामायण’ की रचना में नारदजी का महत्त्वपूर्ण योगदान; सत्यनारायण-व्रत-कथा; श्रीकृष्ण की पटरानियांे से नारदजी द्वारा संगीत-शिक्षा प्राप्त करना

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