Himachal Pradesh: Objective General Knowledge

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ISBN : 978-93-87604-16-2
AUTHOR NAME : RPH Editorial Board
YEAR: 2018
BOOK CODE: R-1581
MEDIUM: Hindi
Format: Paper Back
PRICE: 110

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इस अनन्य पुस्तक ‘हिमाचल प्रदेश - वस्तुनिष्ठ सामान्य ज्ञान’ की रचना विशेष रूप से उन पाठकों के लिए की गई है जो भारत के इस अति-महत्त्वपूर्ण प्रदेश के विषय में विभिन्न कारणों, जैसे-प्रतियोगी परीक्षाओं, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, तीर्थाटन अथवा अन्य प्रयोजनों हेतु वस्तुनिष्ठ एवं नवीन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।
पुस्तक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश़ से संबंधित व्यापक जानकारी को वस्तुनिष्ठ एवं उपयोगी रूप में प्रस्तुत करना है। पुस्तक पूर्णतः सरल एवं पाठक-मित्रवत् रूप में प्रस्तुत की गई है जिससे कि पाठकों को प्रदेश के सामान्य ज्ञान संबंधी सभी पहलुओं से भली प्रकार अवगत करवाया जा सके और उनकी जानकारी को परिपूर्ण बनाया जा सके।
पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ में हिमाचल प्रदेश से संबंधित नवीनतम सामान्य ज्ञान का बहु-उपयोगी कोष संचित किया गया है जो यथार्थ ही इसे ‘गागर में सागर’ प्रमाणित करेगा।
पुस्तक हिमाचल प्रदेश से संबंधित विभिन्न विषयों एवं प्रकरणों की एक इंद्रधनुषी झलक प्रस्तुत करती है। इसमें विभिन्न विषयों पर वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरों के रूप में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं, जैसे-इतिहास, भूगोल, शासन.व्यवस्था, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, कृषि, शिक्षा, वन, पर्यटन, जनसंख्या तथा उद्योग आदि। पाठकों को प्रतिस्पर्धा में अन्य प्रतियोगियों से आगे रखने और सफल बनाने के लिए पुस्तक में अभ्यास हेतु 2000 से अधिक वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर उपलब्ध करवाए गए हैं।

 

Vyakti Parichay; Himachal Pradesh: Ek Drishti Mein. Vastunisht Prashanavali: Aitihaasik Prashbhoomi; Swatantrata Andolan; Bhogolik Sthiti evam Jalvaayu; Parvat Shikhar, Pramukh Ghatiyaan evam Darre; Jal ke Vibhin Strot; Krishi evam Pashupalan; Van, Vanya Jeev Abhyaranya evam Rashtriya Udhaan; Khanij evam Udyog; Parivahan; Jansankhya; Janjatiyaan; Pramukh Jal Vidyut Pariyojnayein; Himachal Pradesh ka Gathan; Prashasnik Sanrachna; Shiksha, Bhasha evam Sahitya; Kala evam Sanskriti; Darshneey Sthal (Dharmik evam Aitihaasik); Samajik Jeevan (Vesh-Bhoosha, Mela evam Utsav); Pramukh Vyaktitatv; Pichli Pratiyogi Pariksha Mai Puche Gaye Mehtavpoorn Prashan.

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