Home/DEVOTIONAL
Show Product:
Total 11 books
Anugita
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

‘अनुगीता’ महाभारत के ‘अश्वमेधिक पर्व’ में आती है । यह भी श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है, किन्तु इसकी शैली बिल्कुल ही भिन्न है । इस गीता में उपदेश रूपकों के माध्यम से दिए गए हैं तथा तीन रूपकों में सारा ज्ञान संजो दिया गया है । इस गीता की मुख्य विशेषता अदृश्य कर्मों और ब्रह्म–रूपी अदृश्य जगत का वर्णन है, जो बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक है । जिन पाठकों ने महाभारत के ‘भीष्मपर्व’ में दी गई मूल गीता को पढ़ा है, उन्हें ‘अनुगीता’ बहुत ही रुचिकर लगेगी । इस गीता पर हिन्दी में पुस्तकों का अभाव है । आशा है, पाठक इस पुस्तक का स्वागत करेंगे ।

Devarishi Narad
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

देवर्षि नारद का चरित्र अति पावन एवं ज्ञानियों का प्रेरणा ड्डोत है। लगभग सभी पुराणों और ग्रंथों में उनका और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों का वर्णन है। उनके उपदेश बहुत ही सारगर्भित और शिक्षाप्रद हैं एवं आज भी सब के लिए प्रासंगिक हैं।
देवर्षि सभी देवताओं, मनुष्यों, राक्षसों आदि के पूजनीय रहे हैं और सबने उन्हें सम्मान दिया है। वे विष्णु के परमभक्त हैं और सारे संसार में उनका गुणगान करते हुए विचरण करते हैं।
नारदजी का प्रत्येक उपदेश भगवान की स्तुति से ओत-प्रोत है और श्रोता को भगवान की भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
नारदजी को अपने चरित्र का कभी अभिमान नहीं हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने भी उनकी प्रशंसा की है जिसे इस पुस्तक में दिया गया है। नारदपुराण से उनकी ज्योतिष और गणितीय क्षमता के दर्शन होते हैं।

Goverdhan Parvat Dharan Leela
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर सात दिनों तक लगातार उठाये रखने, गोपों और उनके पशु-धन की रक्षा करने तथा इंद्र का गर्व भंग करने की लीला उनकी अलौकिक शक्ति का एक अंश मात्रा है। यह घटना दर्शाती है कि श्रीकृष्ण ही परम नियंता हैं और उनके द्वारा प्रदत्त अधिकारों से ही देवताओं को उनकी शक्तियाँ प्राप्त हुई हैं, जिनका उपयोग उन्हें जीवों की भलाई हेतु करना है।
प्रभु द्वारा इंद्र का दर्प भंग करने की अन्य घटनाएँ भी हैं, जिनमें दो प्रमुख हैं। पहली, जब वे अग्नि की तृप्ति हेतु खांडववन दाह के दौरान दावानल को बुझाने का उसका प्रत्येक प्रयत्न विपफल कर देते हैं दूसरी जब वे अपनी पत्नी सत्यभामा की इच्छापूर्ति हेतु इंद्र को युद्ध में हराकर स्वर्ग से परिजात वृक्ष द्वारका ले आते हैं।
भगवान की लीलाएँ अनोखी एवं सरस हैं, जिन्हें बार-बार पढ़ने अथवा सुनने से भी किसी भक्त की तृप्ति नहीं होती और उसकी उनके विषय में अधिक जानने की इच्छा उत्तरोत्तर बढ़ती ही जाती है, जो उसे उनके चरणों तक पहुँचाकर उसके लिए मोक्ष-प्राप्ति का द्वार खोल देती है।

Jaimini Rishi Krit Mahabharat Ka Aashvmedhik...
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

महर्षि जैमिनी व्यासदेवजी के पाँच प्रधान शिष्यों में से एक थे और सामवेद के आचार्य थे। इन्होंने कई प्रसिद्ध पुस्तके लिखी हैं, जिनमें से एक ‘जैमिनीय महाभारत’ भी है, जो व्यासजी की महाभारत से भिन्न रचना है। वर्तमान में इस पुस्तक का केवल ‘आश्वमेधिक पर्व’ ही उपलब्ध है। इसमें कुछ कथाएँ व्यासजी-रचित ‘महाभारत’ में नहीं हैं। प्रस्तुत पुस्तक में जैमिनी ऋषि की इस पुस्तक का सार प्रस्तुत किया गया है और श्रीकृष्ण-सम्बंधित कुछ घटनाएँ ही दी गई हैं। इसमें भगवान के कुछ भक्तों (सुधन्वा, मयूरध्वज, वीरवर्मा, आदि) की बड़ी ही प्रेरणाप्रद कथाएँ सम्मिलित हैं।
पुस्तक में यथासंभव चित्रों का समावेश किया गया है, जिससे पुस्तक अधिक रोचक बन सके।

Pranayam Saadhna Rahasya
By: S.P. Verma
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

ईश्वर ने हमारे शरीर की सुन्दर संरचना की है। शरीर में अवस्थित समस्त अंगों का कार्य सुचारू रूप से चलता रहे इसके लिए श्वांस-प्रश्वांस का प्रकल्प भी मनुष्य को दिया है। नासिका द्वारा श्वांस लेते हैं तो प्राण रूपी जीवनी शक्ति हमारे शरीर में प्रवाहित होती है और हमारे शरीर के कण-कण को व प्रत्येक अंग को व अंगों से होने वाली प्रक्रियाओं को जीवन्त करती है और हम ऊर्जावान महसूस करते हैं। हम अनुभव करते हैं कि शरीर का कोई अंग निष्क्रिय हो जाये तो मनुश्य फिर भी जीवित रहता है। परन्तु श्वांस-प्रश्वांस को संचालित करने वाला अंग फेफड़ा यदि कार्य करना बन्द कर दे तो हमारे श्वांस-प्रश्वांस का प्रकल्प बाधित होने लगता है। हमारे शरीर में श्वांस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया बाधित होने लगती है तो ब्रह्मरूपी प्राण शक्ति भी कमजोर पड़ने लगती है। मनुष्य के जीवन का एक ही मूल मंत्रा अपने शरीर को ऊर्जावान, शक्तिवान, निरोग व स्वस्थ रखना है। जीवन को सुखमय, आनंदमय बनाकर जीना है तो वायु के रूप में नासिका द्वारा प्राण शक्ति अनवरत हमारे शरीर को मिलती रहे उसको जानना व समझना अति आवश्यक है।

Raasleela evam Gopiyan
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

गोपियों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला में एक मध्ुर आकर्षण है, जो अत्यंत मोहित करने वाला है, और गोपियों के श्रीकृष्ण के प्रति आत्मसमर्पण को दर्शाता है। यद्यपि यह लीला भौतिक प्रतीत होती है, किन्तु है यह आध्यात्मिक गोपियाँ स्त्राी रूप में अवतरित महान तपस्वी थे जिन्हें अपने तप के फलस्वरूप रासलीला के रूप में प्रभु का सान्निध्य प्राप्त हुआ, और वे मोक्ष को प्राप्त हो गए। भागवतपुराण में शुकदेवजी ने इस रास लीला का सुंदर वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त ब्रह्मवैवर्तपुराण और श्रीगर्गसंहिता में भी इस लीला का विशद् वर्णन है। इस पुस्तक के लेखन में इन तीनों ग्रंथों से सहायता ली गई है। 

Radha Rani
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

श्रीराधा श्रीकृष्ण की शक्ति हैं। राधा के बिना श्रीकृष्ण पूर्ण नहीं हैं यह बात तो वे स्वयं श्रीराधा से कहते हैं। राधा का चरित्र इतना विशाल और रहस्यमय है कि उसे समझना अत्यंत कठिन है। भागवतपुराण में राधा नाम का उल्लेख नहीं है क्योंकि इस पुराण के वाचक शुकदेवजी की वे परम आराध्या और गुरु थीं, अतः वे उनका नाम नहीं ले सकते थे।
राधा का विशद विवरण ब्रह्मवैवर्तपुराण, गर्ग संहिता, पद्मपुराण और नारद पंचतंत्र में है। इस पुस्तक के लेखन में इन सब ग्रंथों से सहायता ली गई है।

Sankshipt Geeta: Saral Bhasha Mein
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

गीता भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया अनमोल उपदेश है, जब वह महाभारत युद्ध के दौरान, अपने क्षत्रिय धर्म को त्याग कर युद्ध करने से विमुख हो रहे थे। श्रीकृष्ण का यह उपदेश मनुष्य को अपना निर्धारित कर्तव्य करने की राह दिखाता है; आत्मा की अमरता और उसकी गति का निरूपण करता है; समाज में मनुष्यों के विविध प्रकार बताता है; भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग की महिमा की व्याख्या करता है और सफल जीवन जीना सिखाने के साथ ही यह संदेश देता है कि भगवान की शरणागति ही संसार-सागर को पार करने का सर्वोत्तम उपाय है।
गीता सम्पूर्ण उपनिषदों का सार है। कहा गया है कि उपनिषद् यदि गाएँ हैं, तो गीता उनका दूध है। गीता का यह उपदेश इतना गूढ़ और सारगर्भित है कि एक साधारण मनुष्य के लिए इसे समझ पाना अत्यंत कठिन है। इस ग्रंथ के दुरूह विषय को सुगम बनाने हेतु भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य हुए संवाद को लिखा है, अर्थात् वे दोनों जो बातचीत कर रहे हैं, उसे पाठकों को सरल शब्दों में बताया गया है। यह एक नई शैली है, जिससे यह उपदेश सर्वसाधारण द्वारा सरलता से ग्रहण किया जा सकता है और इसे समझने में अधिक कठिनाई अनुभव नहीं होगी। 
इस उपदेश के दौरान भगवान ने अर्जुन को अपनी जो विभूतियाँ बताई हैं, उनसे सम्बंधित यथासंभव चित्र दिए गए हैं, जिससे वे बोधगम्य बन गई हैं।

Srishti Utpatti
By: Ramnath Gupta
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

सृष्टि की उत्पत्ति सदा से ही रहस्मय रही है। प्राचीन ऋषि और आधुनिक वैज्ञानिक आज तक यह नहीं जान पाए हैं कि सृष्टि की उत्पत्ति केसे और किसके द्वारा हुई। ऋग्वेद के दसवें मंडल के 129वें सूक्त, जिसे नासदीय या सृष्टिसूक्त कहते हैं, लिखा है ‘यह सृष्टि किस विधि से किन पदार्थों से, किस आधार पर प्रकट हुई, यह कौन जानता है कौन बताए और किसकी दृष्टि यह सब देख सकती है? क्योंकि सभी इस सृष्टि के बाद ही उत्पन्न हुए हैं, इसलिए यह सृष्टि किससे उत्पन्न हुई कौन जानता है? इस सृष्टि का अतिशय विस्तार जिससे उत्पन्न हुआ, वह इसे धारण किए है, रखे है या यह बिना आधार के ही है? यह सब कुछ वही जानता है, जो परम आकाश में रहने वाला इस सृष्टि का नियन्ता है या शायद परमाकाश में स्थित वह भी नहीं जानता।’

Yogabhyaas evam Pranayam
By: Manoj Arya
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

प्रस्तुत पुस्तक पारंपरिक एवं लोकप्रिय स्वास्थ्य विषयकृ योगाभ्यास एवं प्राणायाम को एक अनूठे रूप में प्रस्तुत करती है। आधुनिक युग के तनाव एवं भागदौड़ से भरे जीवन में अधिकतर लोग अपने स्वास्थ्य का उचित रूप से ध्यान नहीं रख पाते हैं और उसकी उपेक्षा करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे छोटी-बड़ी कई बीमारियों के शिकार बन जाते हैं और समय अथवा धन के अभाव के कारण उनका सही निदान नहीं करवा पाते। इस पुस्तक की मदद से पाठक अपने घर में ही युगों-युगों से आजमाई गई योगासन एवं प्राणायाम की क्रियाएँ सीख सकते हैं और उनके नियमित प्रयोग द्वारा अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं। पुस्तक पाठकों को उनके शरीर, हृदय एवं स्वास्थ्य से परिचय बढ़ाने के लिये प्रेरित करती है तथा साथ ही अधिक स्वस्थ, शांत व एकाग्रचित रहना सिखाती है। पुस्तक सभी प्रमुख योग-मुद्राओं एवं उनके लाभों और उपचार क्षमताओं से परिचित करवाती है। पुस्तक में प्रायः सभी प्रमुख योगाभ्यास उचित विस्तार में स्पष्ट निर्देशों एवं चित्रों के साथ समझाए गए हैं। पुस्तक विद्यालय एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं अन्य जिज्ञासु पाठकों के लिए बहु-उपयोगी है। प्रमुख योगासन, प्राणायाम, मुद्रा एवं बंध पुस्तक में उचित विस्तार में उनके विभिन्न चरणों एवं लाभों के साथ वर्णित हैं। साथ-ही विभिन्न शैक्षिक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी हल-सहित पुस्तक के अंत में समायोजित हैं। आशा है कि पुस्तक योग विषय पर एक उत्कृष्ट कृति सिद्ध होगी।

Yogasan: Sampoorna Swasthya ki Chabi
By: Manoj Arya
  • 0 Ratings
  • 0 Review(s)
  • Availability: In Stock

इस अनुपम पुस्तक ‘योगासनµसंपूर्ण स्वास्थ्य की चाबी’ की रचना उन सभी पाठकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई है जो योगासन द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ बनाना चाहते हैं। आधुनिक युग के तनाव एवं भागदौड़ से भरे जीवन में लोग अपने स्वास्थ्य का उचित रूप से ध्यान नहीं रख पाते हैं और उसकी उपेक्षा करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे छोटी-बड़ी कई बीमारियों के शिकार बन जाते हैं और समय अथवा धन के अभाव के कारण उनका सही निदान नहीं करवा पाते। इस पुस्तक की मदद से पाठक अपने घर में ही युगों-युगों से आजमाई गई योगासन की क्रियाएँ सीख सकते हैं और उनके नियमित प्रयोग द्वारा बिना किसी खर्च के अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं। पुस्तक में अष्टांग योग का संक्षिप्त परिचय योगासन एवं बीमारी,, विद्यार्थी और योगासन व्यक्तित्व विकास और योगासन, योगासन एवं रोग उपचार, स्त्रियाँ एवं योगासन, मानव शरीर की पोषण क्रिया, श्वसन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, प्राणायाम और योगासन, बंधज्ञान, आदि अध्याय एवं अनेक लाभकारी योगासन प्रमुख रूप से सम्मिलित किये गए हैं। आशा है, पुस्तक के समुचित अध्ययन एवं योगासनों के अभ्यास द्वारा आप अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाकर अपने स्वस्थ जीवन का संपूर्ण आनंद ले सकेंगे। स्मरण रखेंµस्वास्थ्य जीवन की सबसे अनमोल निधि है।