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Pranayam Saadhna Rahasya
By: S.P. Verma
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ईश्वर ने हमारे शरीर की सुन्दर संरचना की है। शरीर में अवस्थित समस्त अंगों का कार्य सुचारू रूप से चलता रहे इसके लिए श्वांस-प्रश्वांस का प्रकल्प भी मनुष्य को दिया है। नासिका द्वारा श्वांस लेते हैं तो प्राण रूपी जीवनी शक्ति हमारे शरीर में प्रवाहित होती है और हमारे शरीर के कण-कण को व प्रत्येक अंग को व अंगों से होने वाली प्रक्रियाओं को जीवन्त करती है और हम ऊर्जावान महसूस करते हैं। हम अनुभव करते हैं कि शरीर का कोई अंग निष्क्रिय हो जाये तो मनुश्य फिर भी जीवित रहता है। परन्तु श्वांस-प्रश्वांस को संचालित करने वाला अंग फेफड़ा यदि कार्य करना बन्द कर दे तो हमारे श्वांस-प्रश्वांस का प्रकल्प बाधित होने लगता है। हमारे शरीर में श्वांस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया बाधित होने लगती है तो ब्रह्मरूपी प्राण शक्ति भी कमजोर पड़ने लगती है। मनुष्य के जीवन का एक ही मूल मंत्रा अपने शरीर को ऊर्जावान, शक्तिवान, निरोग व स्वस्थ रखना है। जीवन को सुखमय, आनंदमय बनाकर जीना है तो वायु के रूप में नासिका द्वारा प्राण शक्ति अनवरत हमारे शरीर को मिलती रहे उसको जानना व समझना अति आवश्यक है।

Yogabhyaas evam Pranayam
By: Manoj Arya
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प्रस्तुत पुस्तक पारंपरिक एवं लोकप्रिय स्वास्थ्य विषयकृ योगाभ्यास एवं प्राणायाम को एक अनूठे रूप में प्रस्तुत करती है। आधुनिक युग के तनाव एवं भागदौड़ से भरे जीवन में अधिकतर लोग अपने स्वास्थ्य का उचित रूप से ध्यान नहीं रख पाते हैं और उसकी उपेक्षा करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे छोटी-बड़ी कई बीमारियों के शिकार बन जाते हैं और समय अथवा धन के अभाव के कारण उनका सही निदान नहीं करवा पाते। इस पुस्तक की मदद से पाठक अपने घर में ही युगों-युगों से आजमाई गई योगासन एवं प्राणायाम की क्रियाएँ सीख सकते हैं और उनके नियमित प्रयोग द्वारा अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं। पुस्तक पाठकों को उनके शरीर, हृदय एवं स्वास्थ्य से परिचय बढ़ाने के लिये प्रेरित करती है तथा साथ ही अधिक स्वस्थ, शांत व एकाग्रचित रहना सिखाती है। पुस्तक सभी प्रमुख योग-मुद्राओं एवं उनके लाभों और उपचार क्षमताओं से परिचित करवाती है। पुस्तक में प्रायः सभी प्रमुख योगाभ्यास उचित विस्तार में स्पष्ट निर्देशों एवं चित्रों के साथ समझाए गए हैं। पुस्तक विद्यालय एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं अन्य जिज्ञासु पाठकों के लिए बहु-उपयोगी है। प्रमुख योगासन, प्राणायाम, मुद्रा एवं बंध पुस्तक में उचित विस्तार में उनके विभिन्न चरणों एवं लाभों के साथ वर्णित हैं। साथ-ही विभिन्न शैक्षिक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी हल-सहित पुस्तक के अंत में समायोजित हैं। आशा है कि पुस्तक योग विषय पर एक उत्कृष्ट कृति सिद्ध होगी।

Yogasan: Sampoorna Swasthya ki Chabi
By: Manoj Arya
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इस अनुपम पुस्तक ‘योगासनµसंपूर्ण स्वास्थ्य की चाबी’ की रचना उन सभी पाठकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई है जो योगासन द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ बनाना चाहते हैं। आधुनिक युग के तनाव एवं भागदौड़ से भरे जीवन में लोग अपने स्वास्थ्य का उचित रूप से ध्यान नहीं रख पाते हैं और उसकी उपेक्षा करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे छोटी-बड़ी कई बीमारियों के शिकार बन जाते हैं और समय अथवा धन के अभाव के कारण उनका सही निदान नहीं करवा पाते। इस पुस्तक की मदद से पाठक अपने घर में ही युगों-युगों से आजमाई गई योगासन की क्रियाएँ सीख सकते हैं और उनके नियमित प्रयोग द्वारा बिना किसी खर्च के अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं। पुस्तक में अष्टांग योग का संक्षिप्त परिचय योगासन एवं बीमारी,, विद्यार्थी और योगासन व्यक्तित्व विकास और योगासन, योगासन एवं रोग उपचार, स्त्रियाँ एवं योगासन, मानव शरीर की पोषण क्रिया, श्वसन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, प्राणायाम और योगासन, बंधज्ञान, आदि अध्याय एवं अनेक लाभकारी योगासन प्रमुख रूप से सम्मिलित किये गए हैं। आशा है, पुस्तक के समुचित अध्ययन एवं योगासनों के अभ्यास द्वारा आप अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाकर अपने स्वस्थ जीवन का संपूर्ण आनंद ले सकेंगे। स्मरण रखेंµस्वास्थ्य जीवन की सबसे अनमोल निधि है।